Saturday, February 14, 2026

तुझे चाहना

तुझे चाहना इतनी आदत क्यों है,
कुछ भी सोचूँ सबसे पहले तेरा नाम क्यों है।

मैं खुद को समझाती हूँ हर रोज़ भूल जाने को,
फिर हर सुबह तेरा ही इंतज़ार क्यों है।

हर धड़कन में तेरा ही एहसास बसा है,
फिर भी ये दिल इतना बेक़रार क्यों है।

रातों को नींद से पहले तेरी याद आ जाती है,
आँखों में नमी का ये पैग़ाम क्यों है।

अगर ये सिर्फ मोहब्बत है तो इतनी दर्द भरी क्यों है,
और अगर तू मेरी किस्मत है…

तो फिर तू मेरे पास नहीं, ये सज़ा क्यों है। 

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