मैंने चाहा तुझे, यह मेरी चाहत थी, तूने चाहा मुझे, तेरी ज़रूरत थी। मैंने देखा तुझमें इक हसीं ख्वाब था, तेरी आँखों में बस एक राहत थी। मैंने दिल में तेरा ही अफसाना लिखा, तूने लफ्ज़ों में मेरी हिकायत थी। मैंने दर्द भी तेरा अपना समझा, तूने याद भी मेरी आदत थी। अब फ़ासले हैं, कोई शिकवा नहीं, मेरी चाहत तो थी, पर तेरी हसरत थी।
मेरी बेबसी का आलम ऐसा है, चाहती हूँ तुझसे, पर जता नहीं सकती। तेरे बिना जीना कितना मुश्किल है, यह दर्द भी तुझे बता नहीं सकती। हर साँस में तेरा नाम बसा है, पर लबों से उसे दोहरा नहीं सकती। काश तू समझ पाता मेरी खामोशी, जो आँखें कहती हैं, पर सुना नहीं सकती।
हर एक लम्हा तेरी याद का बोझ ढोता है, बिन तेरे हर रात, एक उजड़ा सा सहर होता है। साँसों में बसती है तेरी खुश्बू की कशमकश, दिल की हर धड़कन पुकारती है तेरा नाम बस। आँखों में समाती नहीं तस्वीर तेरी, ये दूरी बन गई है मेरी सबसे बड़ी बेबसी। कैसे बताऊँ ये हाल-ए-दिल बस इतना है, तुम हो तो दुनिया है, नहीं तो बस तुम्हीं होता है।🥹🥹🥹
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