Thursday, February 6, 2025

अधूरी हसरत


बड़ी हसरत थी तेरे संग ज़िंदगी बिताने की,
हर लम्हा तुझे अपना बनाने की।

तेरे साथ हँसने, तेरे साथ रोने की,
तेरी बाहों में सुकून से सोने की।

मगर तक़दीर को यह मंज़ूर ना था,
हमसफ़र तुझे बनाने का हक़ मुझे ना था।

अब बस तेरी यादों का सहारा है,
एक अधूरी मोहब्बत का किनारा है।

No comments:

Post a Comment

आख़िर दिल मेरा मान तो गया

 आख़िर दिल मेरा मान तो गया, झूठी कसम से आपका ईमान तो गया। आप कहते थे प्यार है मुझसे, देर से ही सही, दिल मेरा जान तो गया। कितनी रातें हमन...