ऐ आशमा अगर तुझे सुनाई देता है,
मेरा दिल रो-रो कर दुहाई देता है।
सजदों में गिरकर भी मिला नहीं सुकून,
तेरा ही नाम हर दुआ में आई देता है।
रातों की तह में छुपा है एक समंदर,
जो तेरी यादों से ही लहराई देता है।
मैं ख़ामोश हूँ मगर मेरी तन्हाई,
तेरे कदमों की आहट सुनाई देता है।
हर ज़र्रा पूछे है मुझसे तेरी ख़बर,
हर आईना तेरा चेहरा दिखाई देता है।
ये इश्क़ भी कैसी अज़ाब की राह है,
जितना भूलूँ, उतना तू समाई देता है।
ऐ आशमा अगर तुझे सुनाई देता है,
मेरी रूह तुझे ही खुदा बताई देता है…
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